नागिन डांस से जुड़ी सच्चाई जान लोगे तो मुंह में रुमाल फंसाना छोड़ दोगे

दुनिया में इंसानों के पैदा होने से पहले पैदा हुए थे सांप. डायनासोर के जमाने से हैं. लेकिन सांप वांप कहने में फील नहीं आता. लगता है किसी पनिहा सांप की बात कर रहे हैं जिसमें जहर नहीं होता. बस उसकी शक्ल डरावनी होती है. नाग कहो नाग. एकदम यमराज वाली फीलिंग आती है. इच्छाधारी की बात कर लो तो राम से काम. पुरानी नागिन से लेकर जानी दुश्मन तक की इमेज घूम जाती है आंखों के सामने. आजकल नागिन डांस हो रहा है. कहां हो रहा है ये नहीं बताएंगे. बस नाग नागिन की कुछ जरूरी बातों के नोट्स ले लो.

1. आंख में DSLR कैमरा फिर बॉयफ्रेंड का बदला

इससे बड़ी झुट्ठई सन 76 के पहले इंडिया में नहीं होती थी. नहीं भूत परेत थे, अगिया बेताल से लेकर बरम राक्षस भी थे. लेकिन नागिन बदला नहीं लेती थी. नागिन फिल्म रिलीज होने के पास लोगों के क्रिएटिव दिमाग में हवा भरी और हज्जारों कहानियां चल निकलीं. मेन थी “नागिन की आंख में हाई रेजोल्यूशन कैमरा होता है. नाग को मारने वाले शख्स की फोटो उसमें कैप्चर हो जाती है. उसी सुराग की मदद से वो कातिल को खोजकर ठिकाने लगा देती है.” इसीलिए कहा जाता है कि सांप को मारो तो फन कुचल दो. आंखें फोड़ दो. बॉडी जला दो.
कुल्य झुट्ठई है. पहली चीज तो सांप को हमारे तुम्हारे जैसा कलरफुल दिखाई नहीं देता. उसको नीली नीली छाया सी दिखती है हर चीज की. वो भी एकदम साफ नहीं. और सुनाई तो देता ही नहीं. वो चीजों को महसूस करता है अपनी खाल के सेंसर्स से. पूरा पेट उनका चिपका रहिता है न जमीन से. अब सोचो जिसकी आंख से बरोबर दिखाई नहीं देता वो फोटो कैसे खींचेगा/खींचेगी?

2. दुद्धू का शौकीन नाग

बहुत बड़का प्रपंच है. पंचतंत्र की कहानियों से निकला होगा. खुशवंत सिंह ने भी ‘मार्क ऑफ विष्णु’ में ऐसी कहानी लिखी है. कि गंगाराम नाम का पुराने जमाने का बांभन आदमी किसी नाग को दूध पिलाता है. लास्ट में वो गंगाराम का किस्सा खल्लास कर देता है. तो बेसिक बात ये है कि सांप दूध नहीं पीता. मांसाहारी सांप को कद्दू की बड़ियां खिलाओगे तो खाएगा थोड़ी. नागपंचमी में जो नाग दिखाने वाले लेकर आते हैं. वो कई दिनों तक सांप को भूखा प्यासा रखे होते हैं. सांप जैसे ही डब्बे से बाहर आता है दूध की तरफ देखता है, बिचक जाता है. लेकिन भूख का मारा बेचारा करे भी तो क्या, दो चार मुंह मारकर अपना काम निकालता है. लेकिन वो दूध उसे महंगा पड़ता है. 15 दिन के अंदर उसकी मौत हो जाती है. लेकिन उसी एक दिन में सांप दिखाने वाले की इतनी कमाई हो जाती है कि उसके मरने से कोई फर्क नहीं पड़ता. और जाते जाते वो दूध वाली कटोरी भी ये कहकर ले जाता है कि इसमें तो सांप ने जहर छोड़ दिया है.

3. पांच फन वाला नाग

फोटोशॉप है बाबूजी. और क्या कहें. द्वापर युग का नाग कालिया भी इसी तरह लीजेंड्स का हिस्सा है. और शेषनाग भी. ये जो फोटो दिख रही है. फेसबुक पर हमेशा घूमती है. व्हाट्सऐप पर भी. पांच लोगों को फॉरवर्ड करने की रिक्वेस्ट के साथ.

4. केंचुली रखने से घर में सांप नहीं आता

हमारे घर में तीन रखे हैं. लेकिन सांप लोग आते हैं, बंसवाड़ियों में और छोड़ जाते हैं कि रख लो. बताओ कैसे कह दें कि नहीं आते. चीड़ का फल रखने से या मोरपंख रखने से. लेकिन ऐसा कोई प्रूफ नहीं है कि नहीं आएगा.

5. नागमणि

दादा बताते थे कि अमावस की रात बीतते भोर को चार बजे ये अपनी बांबी से निकलता है. फिर ओस की बूंदें चाटने के लिए अपने फन से मणि निकालकर रख देता है. फिर ओस चाटने निकल जाता है. ऐसे वक्त में कोई जिगरा वाला आदमी उसके पास जाए और बिना डरे मणि उठा लाए. मालामाल हो जाएगा. मणि खोजने की जरूरत नहीं होती. वो हीरे की तरह दूर से चमकती है. बस जाकर उठाना होता है. लेकिन बी केयरफुल, जो डर गया समझो मर गया.
अमा हमारे नहीं सबके दादा नाना ऐसी कहानियां सुनाते रहे हैं. लेकिन स्मार्टफोन में LED टॉर्च जलाकर नागमणि की खोज में निकला कोई आदमी मिले तो मेरी तरफ से भी साष्टांग दंडवत कर लेना. नागमणि पर पिच्चर भी बनी है. राज कॉमिक्स का किरदार भी है. बस नागमणि नहीं है.

6. बीन बजाता जा सपेरे बीन से बचाता जा

भक यार. अभी तक नहीं समझे. पॉइंट वन की एक लाइन फिर से पढ़ लो. सांप सुन नहीं सकते. उनके पांच फन लगा देओ चाहे 15. कान नहीं खोजे मिलेंगे. होते ही नहीं तो मिलेंगे कैसे. इसलिए सांप सुनते भी नहीं. उनको चक्षुश्रवा इसीलिए कहा जाता है. चक्षु माने आंख और श्रवा माने सुनने वाला. अब आंख से वो कितना सुन पाएंगे जब वो प्रॉपर देख तक नहीं सकते. लेकिन वेट वेट वेट. वो महसूस कर सकते हैं. हमारे तुम्हारे कानों से ज्यादा महसूस कर सकते हैं. तुम्हारी धड़कन भी सुन सकते हैं. उनकी बाहर निकली जीभ वाइब्रेशन महसूस करती है. आवाज भी एक तरह की एनर्जी है, ये तो पता ही होगा. बहुत तेज हो तो शीशे चटक जाते हैं. हल्क 2 पिच्चर देखे होगे तो उसमें दिखाते हैं ‘सोनिक टैंकर.’ उनसे इतनी तेज आवाज पैदा होती है कि हल्क बाबू की हवा खराब हो जाती है. तो आवाज बहुत भारी चीज है. इसको सीधे सीधे न सुनकर वाइब्रेशन के रूप में महसूस करते हैं सांप. और वो बीन की धुन पर कतई नाचते नहीं. वो तो उसकी मूवमेंट को निशाना बनाकर उसे डसने के लिए उसके साथ झूमते दिखते हैं. नागिन पिच्चर में जो बीन की धुन पर हेमंत कुमार नचाए थे, वो तो कलाकारी थी. दैट्स ऑल माई लॉर्ड.

7. खटिया पर सांप नहीं चढ़ता

अच्छा… सिर्फ गैंग्स ऑफ वासेपुर के नवाजुद्दीन सिद्दीकी या फिर तुम्हारा क्लेम है खटिया पर. काहे नहीं चढ़ सकते. उनके ऊपर कोई बंदिश नहीं है. किसी जंतर मंतर से रोके नहीं रुकेंगे. अब मान लेओ उसको भूख लगी है. और उसको खटिया पर चूहा दिख गया. आपके सिरहाने बैठा हुआ. आप सो रहे हैं गदहा बेचकर. तो वो आएगा कि नहीं? आएगा. रिस्क लेकर आएगा. नीचे जमीन पर पानी भरा हो तो वो दौड़कर खटिया पर चढ़ बैठेगा. उसके सामने ऐसी कंडीशंस हों तो वह खटिया क्या बिजली के खंभे पर भी चढ़ जाएगा. नीचे फोटू है देख लो कैसे आराम फरमाते हैं खटिया पर नाग.

8. इच्छाधारी विच्छाधारी कुछ नहीं होता

बता रहे हैं कि सन 55 से पहले इच्छाधारी नागिन टाइप का कॉन्सेप्ट सिर्फ दादी नानी की कहानियों में था. लेकिन सिनेमा ने इसको नई ऊंचाई बख्शी. फिर जब नगीना में श्रीदेवी नागिन बनकर आईं तब तो मन कहिस कि न, हम मान ही नहीं सकते कि इच्छाधारी नागिन नहीं होती. कितनी तो सुंदर नागिन थी. उससे कटाने पर तो अमरीश पुरी की आत्मा भी परसन्न हो गई होगी.
लेकिन किस्सा कहानी तो हो गया. सच्चाई ये है कि धरती पर इंसान से बड़ा इच्छाधारी कोई नहीं है. वो सुबह से शाम तक इतने रूप धरता है कि गिनते गिनते पगला जाओ. रात भर सांप बना बिस्तर में कुंडली मारे रहता है. सुबह उठकर काकचेष्टा करके नोटिफिकेशन चेक करता है. फिर जल की रानी मछली की तरह पांच मिनट में नहाकर निकल जाता है. सारा दिन बैल की तरह ऑफिस में काम करता है. इंद्रधनषी इंसान की महिमा अपरंपार है. लेकिन कोई गंगा में खड़ा होकर कहे कि इच्छाधारी नाग या नागिन होते हैं, तो हरगिज न मानना.

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